Friday, 25 May 2018

Indian Classical - Taal Workshop By Shri Vinayak Prabhu sir at Kalashri Sangeet Vidyalaya Mulund

On Sunday May 13th 2018, Mother's day, I attended the mother of all workshops, called Indian Classical Taal Workshop.


This was organized by Shri Abhay Bhide sir, from Kalashri Sangeet Vidyalaya Mulund West, and he had invited his Guru: shri Vinayak Prabhu from Goregaon, to conduct this workshop.


The venue was our class in Mulund West and the timings were from 5:00 to 8:00 PM
We started with a Tea session, where we introduced eachother to Vinayak Sir. Vinayak sir came along with is two students, Omkar and Vishal.


Vishal plays tabla and also is a very good accompanist.


After the tea session the workshop session began.
The first question was asked by Ms. Vaishali Sathe . She asked:
1. How to perfect the Taal , while singing a bandish.


Vinayak sir first told her to sing a bandish. She started with Raag Bhupali (Bhup) bandish.
"Lakh chabi sawariya ki"


And the entire taal mahiti and the way to perfection of taal, and the description by Vinayak sir was fabulous.
He gave lot and lot of information how this can be done.

















Wednesday, 9 May 2018

Visit to Shirdi Sai Baba Temple

Few days back myself along with my office colleague planned a trip to Shirdi. We drove till Shirdi in a sedan car that was a fabulous 5 hour ride.  Here was the time when the first line came to my mind for my Sai baba song 'chalo sai darbaar chalo'

We took halt in between for some morning pet pooja :) breakfast and garmagaram tea. we left at 5 in the morning from Mumbai Mulund West and took a halt at 7 Morning when the sun had already risen high. It was a enjoyable experience to have tea that time, with friends. Later we proceeded to shirdi and reached there by 10 30.

We immediately rushed to take VIP passes since that was a holiday and there were lot of rush. But with our trump card of VIP pass we got an easy fast and 15 min long darshan of sai baba. it was a divine experience. That moment the other lines for my song, came to my mind.

I began framing the sentences in my mind and tried not to forget them, before I get pen and a paper to note it down.

Following is the Youtube link for Saibaba song



Wednesday, 14 January 2015

Apne Janm Din Par - A poem

This poem starting four lines were written by my daughter Niharika Butani, and based on that i wrote this poem.

अपने जन्मदिन पर
पिताजी को देखकर
मैं फूली 
न समाई
आगे पीछे डोलकर
नाज़ों से यूं बोलकर
मैं फूली 
न समाई
पलको में सपनो को छिपकर जो बैठी हूँ
उन सपनो को हकीकत के पर लगाने बैठी हूँ
मन के सारे अरमान
है तारो भरा आसमान
में संग
लेकर आई
अपने जन्मदिन पर
पिताजी को देखकर
मैं फूली 
न समाई
मेरे पिताजी तो हरदम मेरे आँखों में रहते है
बेटी में हूँ पास तेरे यह हरदम आके कहते है
झूम के में मारती हूँ तापा
कहती हूँ में ई लव यू पापा
यह खुशी
सबको सुनाई
अपने जन्मदिन पर
पिताजी को देखकर
मैं फूली 
न समाई
मेरी प्यारी सी बेटी तू तोह आँखों का तारा है
मेरा यह जीवन बस तुझपे वारा है
तू ही दिल में बसी है
तू ही मन में रची है
यह बोली
तूने बनायीं
अपने जन्मदिन पर
पिताजी को देखकर
मैं फूली 
न समाई
अपने मम्मी के दिल में तेरा रंग खिलता है
तू ही है जो मेरे खुशियों से आके मिलता है
तू ही है जो मेरे खुशियों से आके मिलता है
तेरे बिना क्या है कुछ भी नहीं
तू ही बस तू है सब कुछ यहीं
हर आस
तूने जगाई
अपने जन्मदिन पर
पिताजी को देखकर
मैं फूली 
न समाई

This poem starting four lines were written by my daughter Niharika Butani, and based on that i wrote this poem.
A poem by Kanu Butani

Tuesday, 30 December 2014

Christmas Celebrations in my Office





The Christmas was celebrated in our office by the "Great place at work" team, who introduces some extra curricular activities in the office , This time they came up with a very unique idea of starting with a "Your cubicle decoration with the Christmas theme" competition.




This was certainly a great idea and many people participated in it with lot of enthusiasm. The team just behind my desk, created a very beautiful decoration of the cubicle. They were working on it for 3 hours continuously, wrapping the cartoons, the read tapes and jhalars and the while cotton to get the effect of snow. Small Santaclause and a tiny snow man . That was really wonderful. Below is their picture.



The another cubicle decorated the cubicle with a different manner.
Mother Mary in a hut with Jesus Christ and his friends.
Red and white ballons all arond the cubicle
With green trees and the gifts wrapped in different coloured baskets
The Santa clause with an empty face so that any one can come and take its photo with it.
So i took the change the took my photograph.
That was great



Thursday, 18 December 2014

A wrist Band created by my daughter

This is a wrist band crafted by my daughter.
She collected beads and threads of different styles and created this wonderful band.


This is the first time she has created this band. Its looking very nice. The beads and the threads are going well with each other.


The knot also is perfectly done and the finishing of this thread just looks professional


The beads also remind me of the mantra jaap mala that we use to chant lord's name. Om Namah Shivaye. Great going. Keep it up.


Wednesday, 9 July 2014

Gurbani shabhads - Sindhi Translation by Kanu Butani

राग सूही , महला पंजवा , छंद 
इक ओंकार सतगुर प्रसाद ||

मिठ बोलरा जी हर साजन स्वामी मोरा 

केदो मिठो थो गालाहे मुंहिंजो प्यारो सुहणो साई |
हउ समल थकी जी ओ कदै न बोलै कउड़ा 
मां परखे थकजी पियास, पर कढह न कउरो गालायईं ||
कउड़ा बोल न जाने पूरण भगवाने अवगुण को न चितारे 
कौड़ा अखर कोन जाणे पूरो पारब्रह्म मुहिंजा अवगुण कीन ढेखारे |
पतित पावन हर बिरद सदाए इक तिल नहीं भनै घालै 
पाहिजो पाण करे पतितं खे पावन ज़रो न कहिखे विसारे ||
घाट घाट वासी सरब निवासी नेरे ही ते नेरा 
हर दिल में हर हंद आ, नज़दीकन खा नज़दीक |
नानक दस सदा सरनागत हर अमृत साजन मेरा 
नानक दस सदा तो शरण  अमृत जिया मूं मीत ||

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गौरी महला पंजवा

तिस गुर कोउ  सिमरउ सास सास 
हुन गुरुअ खे जप सास सास |
गुर मेरे प्राण सतगुर मेरी रास 
गुरू मुंहिंजो साहु सतगुर मुंहिंजी रास ||
गुर का दरसन देख देख जीवा 
गुरुअ जो दर्शन डिसी डिसी जीयां |
गुर के चरण धोए धोए पीवा 
गुरुअ जा चरण धोई धोई पियां ||
गुर की रैण नित मंजन करउ 
गुरुअ जी मिटीय सां मां सनान करियां |
जनम जनम की हउमै मैल हरउ
जनमन जे अहम जो गन्दु कढा ||
तिस गुर को झुलवओ पाखा 
हुन गुरुअ खे मा चवण झूलायां वई | 
महा अगन ते हाथ दे राखा 
वडयुन बाहियुन मा ढेइ हथ सम्भालियई ||
तिस गुर के ग्रिहि देवउ पाणी 
हुन गुरुअ जे घर मा दियां पाणी |
जिस गुर ते अकल गत जानी 
जह गुरुअ खा मूं साहब राह जाणी ||
तिस गुर के ग्रिहि पीसउ नीत 
हुन गुरुअ जे घर कणक पीसियां |
जिस परसाद वैरी सब मीत 
जै किरपा दुश्मन सब दोस्त थिया || 
जिन गुर मउ को दीना जीउ 
जय गुरुअ मुखे जीवन डिनो  |
आपना दासरा आपे मुल लिओ
पहिंजो दास ठाहे पहिंजो मुल वरतो  ||
आपे लाइयो अपना पिआर 
हुन पाण डिनो पहिंजो प्यार |
सदा सदा तिस गुर को करी नमस्कार 
सदा सदा हुन गुरुअ खे कर नमस्कार ||
कल कलेस भै भरम दुःख लाथा 
तक्लीफुन डपन भरम दुख निकता |
कह नानक मेरा गुर समरथा 
नानक चाये मुंहिंजो गुरु शक्ति दाता ||

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बसंत महला तीजा 

बसंत चड़िया फूली बनराइ 
बसंत आयो गुल फुल टिरया आहिन |
एह जीअ जंत फूलह हर चित लाइ 
जीव टिरंदा जढह हर सा चित लाहिन ||
इन बिध इह मन हरिया  होइ 
ईय कंदे हीयू मन साओ रहंदो |
हर हर नाम जपै  दिन राती गुरमुख हउमै कढै धोई 
हर हर नालो जप दीहरात गुरमुख अहम धोपजी वेंदो ||
सतगुर बाणी शबद सुणऐ 
सतगुरु बानी ऐं सब्द पियो बधाए |
यह जग हरिया सतगुर भाए 
सतगुर जे प्यार सां जग सावक पाये ||
फल फूल लागे जा आपे लाए 
गुल फुल खिलन जडह पाण चाहे |
मूल लगै ता सतगुर पाये 
सतगुर सां मिली समझूँ मूल छाहे ||
आप बसंत जगत सभ वाडी 
पाण बसंत जग साजो आ बाघु |
नानक पूरै भाग भग़त निराली 
नानक इह भक्ति मिले जिन आहे सुभाग ||

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आसा 

सुतु अपराध करत है जेते 
बार करो बि करे ढो |
जननी चीत न राखस तेते 
मऊ मन में न रखे को ||
रामैया हउ बारक तेरा 
रामैया आसीन तुहिंजा बार | 
काहे ना खंडस अवगुण मेरा 
छोना असांजा मिटाईं अवगुण ||
जे अत क्रॉप करे कर धाइया
केतरो बि गुसे में भजी वञे |
ता भी चीत न राखस माइया 
मऊ मन में कान थी रखे || 
चिंत भवन मन परियो हमारा
मन में यह ई  चिंता आहे |
राम बिना कैसे उतरस पारा 
राम बिना किय पार पाये ||
देह बिमल मत  सदा सरीरा |
मु सरीर खे ढे हमेशाये मत |
सहज सहज गुण रवै कबीरा || 
कबीर तोखे गायां हर वक्त ||


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Wednesday, 2 July 2014

कानू के दोहे


कानू के दोहे
1 कलिक पर सफ़ेद तिनका, कलिक और चमकाए
सफ़ेद पे कलिक तिनका, कभी न मिटने पाये
2 कंचन काया किस काम की, प्रिय जे मन न भाये
औरन लख खुशियाँ देइ , पर चैन तनिक न पाये
3 प्रिय सँगै लाखों पल , पलछिन में गुज़रे भाई
जुदाई का इक पल गुज़रै, देकर लख कठनाई
4 इक बार भी जोउ कोई, बचावे तोहैं गिरने से
चिराग लेकर भी ना मिले, ऐसा व्यक्ति ढूंढने से
5 बहूत लोग मिलेंगे जो , करेंगे तेरी खुशामत
सही बात बताने वाले , नहीं करेंगे बनावट
6 उनको कभी न भूलना, जो साथ दे कब तेरा
उनको कभी ना छोड़ना, जो साथ न छोड़े तेरा
7 कुछ लोग ऐसे मिलेंगे, जो तुझे सहेंगे नहीं
उनसे भी अच्छा चल फिर बुरे रहेंगे नहीं
8 गीतों में सुरों में यारा ,ढूँढू खुशियों का भंडार
जग में कौन है ऐसा , जो ख़ुशी से भरे संसार
9 बांधकर दिलको इस धागे से, जकड लिया तूने ऐसे
पानी को पकडे प्यासा कोई, रोटी को बूखा जैसे
10 आँखों से अश्रू बहते , रहते है हर वक़्त
देखके इस दुनिया के, चलन इतने सक्त
11 मात पिता की आज्ञा का , कर हरदम पालन
उनकी अपार कृपा से , पतझर भी बनजाये सावन
12 जिसने तुझको रह दिखाई , और रौशन किया संसार
उसको कुछ और न देना, बस व्यक्त करना आभार
13 मन में उस तस्वीर को , रखना हरदम जीवित
जिसने तेरे मन को हरदम रखना चाहा पुलकित
14 पंखों से उड़ान होती नहीं, जितना मन उड़ा ले जाई
है यकीन इसका नहीं, तो खुद ही आज़मा ले भाई
15 चंचल जितना मन होता है, उत चंचलता नहीं किसी में
जो यह चंचलता काबू करे, रब को बस ढूंढ उसी में
16 रंग लाल नीला ना पीला , रंग एक है ईश्वरीय रंग
लग गया यह रंग तो फिर, घूम लै ई स्वर्गीय उमंग
17 पल पल ईश्वर कउ नाउ , चढ़ा है ज़ुबाँ पे होई
झूम उठै मस्ती मैं पाउ , बस ख़ुशी कै गीत गाई
18 कपटी शातिर बेईमान , काले मन का रखनेवाला
यह बात को सहिमान , तेरा कुछ नहीं चलनेवाला
19 दूसरों के जीवन में राही ,गंद कचीरा भरनेवाले
तेरा कुछ न होगी जान, तंग पसीरा करनेवाले
20 नज़र लग न जाये कहीं, कोई हसते खेलते परिवार को
रब से यही मांगू दुवा, कर सार सांभर हरवार को
21 जब जीवन में तकलीफ का , सर पे गिर जाये पहाड़
बुज़ुर्गों की सलहा लेकर , हलका कर अपना ई भार
22 बुज़ुर है तो विश्वास है, कुछ भी गलत हो सकता नहीं
घर में एक मिठास है , कुछ भी फीका हो सकता नहीं
23 जिस घर में बुज़ुर्ग नहीं, बहुत संभल के चलना जी
कब हो जाये झगड़ा घर में, न जाने क्या होना जी
24 बुज़ुर्ग नहीं तो वोह स्वर्ग, कब नरक में बदल जाये
पल में खुशियों पर भैया , गम का साया मंडराएं
25 बुज़ुर्ग है पर उनका कहना, मानने से करे इंकार
बस समझलो नाश होना, उस घर का है पक हार
26 बुज़ुर्ग जो कहते है, उनके जीवन का है सार
उनके बोल सच है , कर नहीं को सके इंकार
27 बुज़ुर्गो की बात तुझे , दलदल से भी निकाल देगी
एक बार मान के देख , तेरी तो कमाल हैगी
28 जो न माने बुज़ुर्ग की, फंस जायेगा दलदल
निकलना चाहे पर और ही, फसता जाए पलपल
29 प्यासा पानी कहीं से भी , भर भर कर पी लेगा
बूखा पता खींच कर भी, खा कह कर जी लेगा
30 जब न खाना चाहिए किसको, चाहे करलो कुछ भी
जोर जबरन करके भी तुम, खिला न सकोगे कुछ भी
31 जब देह छोड़नी है होती, तब खाना पीना छूटता है
पता भी नहीं चलता कब कैसे, यह सब हो पड़ता है
32 जब कोई मर जाता है, तो दुःख बड़ा ही होता है
दिल में यादें उमर कर, दिल यह कितना रोता है
33 जानते है सब इस बात को, मरना तो सबको है
पर जब होता है उनके साथ, होता दुःख सबको है
34 चंचल मन फिरता रहता , किसका नहीं वोह सुनता है
अपनी मनमानी करके, अपने ही सपने बुनता है
35 इज़्ज़त देना सब बहनो को, चाहे और कुछ देना नहीं
चाहते है वोह इज़्ज़त से जीना, हक़ यह लेना नहीं
36 औरत की इज़्ज़त गहना है, सबसे अनमोल याद रखो
उसको कभी चुराना नहीं, वह गहना आबाद रखो
37 औरत कुछ भी सह सकती, पर अपनी इज़्ज़त पर दाग नहीं
मर जायेगी जीते जी वोह, गर इज़्ज़त उसके भाग नहीं
38 और नहीं देख सकती वोह, अपना उजरता सुहाग
दुहाई ऐसी निकलेगी मन से, बुझ न पायेगी आग
39 उसके बच्चे को हानि पहुचाये , ऐसा दिन न आये कभी
मिटा देगी साड़ी दुनिया वोह, तब मर जायेंगे सभी
40 इज़्ज़त आबरू औरत के, उससे खेलना कभी नहीं
आग जो उससे निकलेगी , बच सकेगा कोई नहीं
41 बुज़ुर्गो की जो सुनता नहीं, उसे खाख छाननी पड़ती है
आसमान भीं नहीं होता उसका, न उसकी होती धरती है
42 बुज़ुर्ग जो कहे, सुनले, मानके चल उस राह पर
बच जायेगा भटकने से , इस दुनिया में दर दर
43 दर बदर की ठोकरें खायेगा , तूने गर बड़ो का नहीं सुना
जानले राही जानले उस वक़्त , तूने खुदको ही नही बुना
44 मर जाना पर निभाना हरदम अपने धरम ईमान को
मिटे चाहे अहम तेरा , पर बरक़रार रखना जुबान को
45 लगाम लगा घोड़े को, पर फिर भी कुछ न पाया हो
जो न लगाम लगा सके, अपनी कांची सी जुबां को
46 रोक सके जो जिभीया को अपने, वोह रोक सकता ब्रमांड को
चाहे कोई भी झगड़ा चलरहा , रोक सकता वो उस विवाद को
47 चुप कर के बैठना, एक कला है जो मुश्किल है
जिसने सीख ली यह कला, उसका जीवन महफ़िल है
48 मंज़िल पा सकता है वोह, जो मू बंद करके काम करे
वोह बैठा रहेगा वहीं , जो मू खोल अपना नाम करे